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महाराणा प्रताप जयंती

Published On : April 23, 2024  |  Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant

महाराणा प्रताप का महत्व

भारत माता के एक ऐसे सपूत का नाम है। जो सदियों के गुजर जाने के बाद भी स्मरणीय एवं अमर है। काल चक्र की करवट तले अनेकों युग वीरों ने इस धरती पर जन्म लेकर इसे धन्य बनाया था। इसी प्रकार महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया जिनका पूरा नाम है ने इस धरती पर ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया दिन रविवार को एवं विक्रमी संवत 1597 में जन्म लिया था। हिन्दू धर्म के स्वाभिमान की रक्षा के लिये तथा मुगलों को आइना दिखाने के लिये इन्होंने उन्हें कई बार बड़े ही पराक्रम से साथ खदेड़ा था। और मुगल बादशाहों को पराजित भी किया था। उनकी वीरता एवं धीरता तथा साहस एवं पराक्रम का आज भी गुणगान किया जाता है। यानी अपने राज्य एवं धर्म में आने वाले प्रत्येक संकट से डटकर मुकाबला किया और मुगलों की सेनाओं को अनेकों बार पराजित किया था। उनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ़ यानी मेवाड़ में हुआ था।  इस संबंध में  विजय नाहर जो इतिहासकार है। कहते है कि महाराणा प्रताप का जन्म पाली के राजमहल में हुआ था। हालांकि उस समय मुगलों द्वारा धड़ल्ले से सेनाओं को जोड़कर जनमानस एवं कमजोर राज्यों में लूटपाट एवं आक्रमण होते रहते थे। जिससे अनके युद्धों एवं संग्रामों की बाते सामने आती है। हालांकि उनके संबंध में इतिहासकारों ने अनेकों संदर्भ दिये हुये हैं। मुगलों ने उन्हें अनेको बार नीचा दिखाने के लिये कई हजारों सैनिकों को एक साथ लेकर आक्रमण किया था। जिसमें अकबर ने भी उन्हें नीचा दिखाने का प्रयास किया था। किन्तु उस वीर सपूत ने उसे ही नीचा दिखाया दिया और उसे हार का सामना करना पड़ा था। भारत के इतिहास के पन्नों में अंकित महाराणा प्रताप का नाम बड़े ही उत्साह के साथ लिया जाता है। महाराणा प्रताप के अनेक चित्र भारत के प्रशासनिक भवन एवं हिन्दूओं के घरों में प्राप्त होते हैं। महाराणा प्रताप जयंती पर इनको स्मरण करते हुये लोगों को दान दक्षिणा दिया जाता है। तथा उनकी पूजा भी की जाती है। महाराणा प्रताप जयंती: वीरता, स्वतंत्रता, गर्व, प्रेरणा, राजस्थान, योद्धा, समर, शौर्य, धैर्य, स्मृति।

महाराणा प्रताप एवं अन्य तथ्य

इनकी वीरता की अमर गाथा को आज भी हिन्दू धर्म बड़े गौरव के साथ याद करता है। तथा ऐसे महान पराक्रमी सपूत की प्रतिमा को दिल्ली के विरला मन्दिर में बनाया गया है। जो अत्यंत मोहक एवं सजीव है। महाराणा प्रताप का राज्याभिाषेक 28 फरवरी 1572 में हुआ था। उन्होंने देशकाल एवं परिस्थिति वश 11 विवाह किये थे। जिससे कई पुत्र रत्न एवं पुत्रियों का जन्म हुआ था। अकबर बादशाह महाराणा प्रताप को अपने में मिलाने के लिये अनेक कूटनीतिक एवं राजनीतिक प्रयासों को किया किन्तु उसे कोई सफलता नहीं मिली थी। और महाराणा प्रताप उसके युद्ध की चुनौती को स्वीकार किया था। राजपूतों की सेना ने बड़ी बहादुरी से उसका मुकाबला किया था। जिससे हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप ने जीत लिया था। महाराणा प्रताव का घोड़ा चेतक भी बड़ा ही पराक्रमी था। अपने युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ था। महाराणा प्रताप लगातार 12 वर्षो तक मुगल सेना से संघर्ष करते रहे। और उन्हें कमजोर करते हुये अपने राज्य का विस्तार किया था। अपनी मातृभूमि की स्वधीनता की लड़ाई में उन्होंने कभी भी हार नहीं मानी जिसे कई फिल्मों एवं इतिहासकारों ने बाखूब ही लिखा है। कि धन्य माता भारत के अमर एवं वीर सपूत कभी अपनी आन-बान एवं शान को कम नहीं होने दिया और मुगलों की विशाल सेना को पराजित करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया था। अतः अपने देश भक्ति एवं वीरता पूर्ण पराक्रम के लिये यह सदैव अमर रहेंगे। इनकी जन्म जयन्ती लोगों के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है। महाराणा प्रताप जयंती: गौरव से मनाएं, वीरता को याद करें।

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