मां कात्यायनी के बारे मे
Published On : April 2, 2025 | Author : Astrologer Pt Umesh Chandra Pant
मां कात्यायनी की पूजा: नवरात्रि के छठे दिन का महत्व
नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप, मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। यह देवी शौर्य, पराक्रम और विजय की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं। मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इनकी उपासना से साधक को साहस, शक्ति, भयमुक्त जीवन और विवाह संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी की कथा, स्वरूप और महिमा के बारे में…
मां कात्यायनी का परिचय
मां कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन की तपस्या के फलस्वरूप हुआ था। उन्होंने भगवती से प्रार्थना की कि वह उनके घर पुत्री रूप में जन्म लें। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां आदिशक्ति ने उनके घर जन्म लिया और इसीलिए इन्हें कात्यायनी कहा गया।
जब महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को परेशान किया और इंद्रलोक पर अधिकार कर लिया, तब त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की संयुक्त ऊर्जा से मां कात्यायनी प्रकट हुईं और उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं को मुक्त किया।
पौराणिक कथा: महिषासुर मर्दिनी
महिषासुर बहुत शक्तिशाली असुर था, जिसे ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि कोई पुरुष उसे नहीं मार सकता। यह वरदान पाकर वह अहंकारी हो गया और स्वर्ग लोक पर आक्रमण कर देवताओं को पराजित कर दिया।
तब सभी देवताओं ने अपनी शक्तियों को एकत्र कर मां दुर्गा के रूप में कात्यायनी को जन्म दिया। मां कात्यायनी ने दसों दिशाओं को हिला देने वाले युद्ध में महिषासुर से लड़ाई की और अंततः उसका वध कर दिया। इस रूप में मां को महिषासुरमर्दिनी भी कहा जाता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप
1. मां कात्यायनी के चार हाथ होते हैं।
2. उनके एक हाथ में तलवार, दूसरे में कमल पुष्प, तीसरा हाथ वर मुद्रा में और चौथा अभय मुद्रा में रहता है।
3. इनका वाहन सिंह है, जो वीरता और शक्ति का प्रतीक है।
4. उनका तेजोमय रूप साधकों के भय और दुर्बलता को समाप्त कर आत्मविश्वास का संचार करता है।
मां कात्यायनी की उपासना का महत्व
मां कात्यायनी की पूजा से शत्रु भय, दुर्व्यवहार, भयग्रस्तता, नकारात्मक शक्तियों और असफलताओं से मुक्ति मिलती है। विशेषकर जिन कन्याओं के विवाह में बाधा आ रही हो, उनके लिए मां कात्यायनी की आराधना अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
कात्यायनी व्रत का उल्लेख पद्म पुराण और भागवत पुराण में भी आता है, जिसे विवाह की कामना करने वाली कन्याएं करती हैं। मां कात्यायनी की कृपा से जीवन में सफलता, साहस और विजय प्राप्त होती है।
मां कात्यायनी का मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
FAQs: मां कात्यायनी की पूजा से जुड़े प्रश्न
1. मां कात्यायनी की पूजा कब की जाती है?
मां कात्यायनी की पूजा नवरात्रि के छठे दिन की जाती है।
2. मां कात्यायनी को किस रूप में पूजा जाता है?
मां कात्यायनी को महिषासुर का वध करने वाली वीरता की देवी माना जाता है।
3. मां कात्यायनी की उपासना से क्या लाभ होता है?
उनकी उपासना से साहस, शक्ति, भयमुक्त जीवन और विवाह संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
4. मां कात्यायनी का वाहन क्या है?
मां कात्यायनी का वाहन सिंह है, जो शक्ति और पराक्रम का प्रतीक है।
5. मां कात्यायनी के स्वरूप की विशेषताएं क्या हैं?
उनके चार हाथ होते हैं, जिनमें तलवार, कमल, वर मुद्रा और अभय मुद्रा होती है।
6. विवाह में बाधा दूर करने के लिए कौन-सा व्रत किया जाता है?
कन्याएं विवाह की कामना के लिए कात्यायनी व्रत करती हैं, जिसका उल्लेख पुराणों में भी है।
7. मां कात्यायनी को महिषासुरमर्दिनी क्यों कहा जाता है?
क्योंकि उन्होंने महिषासुर का वध कर देवताओं को उसकी क्रूरता से मुक्त कराया था।
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